कराची (पाकिस्तान)। संस्कृतिकर्मी और नारी अधिकार कार्यकत्री शीमा किरमानी कि गिरफ्तारी को लेकर पाकिस्तान में एक बार फिर महिलाओं के अधिकार और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस तेज हो गई है। कराची में महिला मार्च से जुड़े प्रदर्शन के दौरान शीमा किरमानी पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने और कथित तौर पर धक्का-मुक्की किए जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। शीमा किरमानी कराची प्रेस क्लब के बाहर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल थीं। मार्च के आयोजक आगामी कार्यक्रम के लिए एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की मांग कर रहे थे। इसी दौरान सिंध पुलिस ने सात कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हालांकि विवाद बढ़ने पर बाद में बाद में सिंध के गृह मंत्री के हस्तक्षेप के बाद हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया।
मालूम हो कि शीमा किरमानी पाकिस्तान की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना, थिएटर कलाकार और महिला अधिकार कार्यकत्री हैं। उनका जन्म 16 जनवरी 1951 को रावलपिंडी में हुआ था। उन्होंने कई दशकों तक पाकिस्तान में कला, संस्कृति और महिला अधिकारों के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है। शीमा किरमानी खास तौर पर पाकिस्तान में भरतनाट्यम को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने के लिए जानी जाती हैं। रूढ़िवादी विरोध के बावजूद उन्होंने शास्त्रीय नृत्य को जारी रखा और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया। युवा दर्शकों के बीच उनकी पहचान वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय पसूरी (च्ंेववतप) गाने से भी जुड़ी है। अली सेठी और शे गिल के इस चर्चित गीत के वीडियो में उनके भरतनाट्यम प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली थी। शीमा किरमानी तहरीक-ए-निस्वां नाम का एक सांस्कृतिक और नारीवादी संगठन चलाती हैं। यह संगठन महिलाओं के अधिकार, थिएटर, शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता पर काम करता है।
शीमा किरमानी खुद को खुलकर नारीवादी और मार्क्सवादी विचारधारा से जुड़ा बताया है और लंबे समय से लैंगिक असमानता, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और कलात्मक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर आवाज उठाती रही हैं। पाकिस्तान में जनरल मुहम्मद जिया-उल-हक के शासनकाल के दौरान जब सांस्कृतिक गतिविधियों और नृत्य पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे, तब भी उन्होंने शास्त्रीय नृत्य सिखाना और प्रस्तुतियां देना जारी रखा था। शीमा किरमानी एक इज्जतदार खानदान से तअल्लुक रखती हैं। उनके पिता पाकिस्तान सेना में अधिकारी थे और बाद में कराची इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन के चेयरमैन बने। उनके पैतृक संबंध लखनऊ और ईरान के करमान क्षेत्र से बताए जाते हैं, जबकि मातृ पक्ष भारत के हैदराबाद से जुड़ा है। उनकी शादी पाकिस्तानी थिएटर कलाकार और लेखक खालिद अहमद से हुई है। दोनों लंबे समय से पाकिस्तान के थिएटर और सांस्कृतिक जगत में सक्रिय हैं।
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