हर कदम पे यहां उल्लास होना चाहिए
भाईचारे का स्थायी वास होना चाहिए
भाइयों को भाइयों के पास रहना है यहां
मंदिरों को मस्जिदों के पास होना चाहिए।
आरती के साथ ही गूंजे अजानों की सदा
होलियों में ईद का आभास होना चाहिए।
जो लिखा है खून से उसको मिटा दो आज तुम
प्रेम से लिखा हुआ इतिहास होना चाहिए।
रात में ही खत्म हो जाए उदासी रात की
हर नया दिन इक नया मधुमास होना चाहिए।
-गुलशन मदान

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