हर नया दिन इक नया मधुमास होना चाहिए .. ग़ज़ल - गुलशन मदान Gulshan Madan Poetry



हर कदम पे यहां उल्लास होना चाहिए

भाईचारे का स्थायी वास होना चाहिए


भाइयों को भाइयों के पास रहना है यहां

मंदिरों को मस्जिदों के पास होना चाहिए।


आरती के साथ ही गूंजे अजानों की सदा

होलियों में ईद का आभास होना चाहिए।


जो लिखा है खून से उसको मिटा दो आज तुम

प्रेम से लिखा हुआ इतिहास होना चाहिए। 


रात में ही खत्म हो जाए उदासी रात की

हर नया दिन इक नया मधुमास होना चाहिए।

-गुलशन मदान

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