वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन लगातार भारत और भारतीयों के हितों को चोट पहुंचाने वाले काम कर रहा है, इससे अमेरिका को भी नुक्सान हो रहा है। लगातार ट्रंप प्रशासन की आलोचना हो रही है। भारत विरोधी कार्रवाइयों से अमेरिका को भी हानि हो रही है लेकिन ट्रंप समझने को तैयार नहीं हैं। अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के हितों के लिए काम करने वाले अमेरिकी संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) ने सोमवार को अमेरिकी कांग्रेस और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा से विदेशी छात्रों और शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत यहां आने वाले लोगों के लिए चार वर्ष की नयी वीजा सीमा के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की अपील की।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज के नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा कि यह अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को खुद ही कमजोर करने वाला कदम है। मालूम हो कि अमेरिका ने हाल में विदेशी छात्रों, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत अमेरिका आने वाले लोगों (एक्सचेंज विजिटर्स) और पत्रकारों के वीजा संबंधी नियमों को कड़ा कर दिया है। इसके तहत पहले की उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जिसमें ये लोग सरकारी निगरानी के बिना अनिश्चितकाल तक अमेरिका में रह सकते थे।
खंडेराव कंद ने कहा कि चार वर्ष की समयसीमा आज की उच्च शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। स्नातक की डिग्री पूरी करने में औसतन 52 महीने और पीएचडी पूरी करने में पांच से अधिक वर्ष लगते हैं। यूएससीआईएस के पास पहले से ही 1.1 करोड़ से अधिक आवेदन लंबित हैं और उनकी प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक वर्ष लग रहा है। ऐसे में छात्रों को अपनी पढ़ाई या शोध बीच में ही छोड़कर जाना पड़ सकता है। शोध प्रयोगशालाएं महत्वपूर्ण प्रतिभाओं से वंचित हो जाएंगी और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता अपने प्रतिस्पर्धी देशों के हाथों सौंप देगा।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज ने अमेरिकी प्रशासन से इस नयी व्यवस्था के क्रियान्वयन पर रोक लगाने, विदेशी छात्रों के हितों की रक्षा करने और अमेरिका के अनुसंधान तथा नवाचार तंत्र को सुरक्षित रखने की अपील की। एफआईआईडीएस का कहना है कि 2025 के शरदकालीन प्रवेश सत्र में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नए दाखिलों में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ी कमी है।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज ने बताया कि 96 प्रतिशत शैक्षणिक संस्थानों ने इस गिरावट के लिए वीजा संबंधी चिंताओं को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका में इस समय करीब 12 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं, जो हर वर्ष अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगभग 55 अरब डॉलर का योगदान देते हैं।
एफआईआईडीएस ने अमेरिकी कांग्रेस से अपील की कि वह एफ-1 और जे-1 वीजा धारकों के लिए पहले की तरह पढ़ाई पूरी होने तक रहने की व्यवस्था बहाल करने अथवा ऐसे कानून का समर्थन करे, जिसके तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को विशेष छूट दी जाए जिनकी औसत अवधि 48 महीने से अधिक होती है। संगठन ने ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम 64 महीने तक की अवधि तथा उसके बाद इसे स्वतः बढ़ाए जाने का भी सुझाव दिया।
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