जेलेंस्की को युद्ध खत्म होने की उम्मीद, अमेरिकी-यूरोपीय प्रस्ताव से सहमत, लेकिन अपनी शर्तें भी रख रहे, पुतिन जता चुके हैं आपत्ति Zelensky hopes the war will end, agrees to the US-European proposal, but is also setting his own conditions, to which Putin has already expressed objections



कीव। करीब 4 साल से जारी युद्ध से लगता है वोलोदिमीर जेलेंस्की थक चुके हैं। अपनी सहमति जताने के बावजूद वे कुछ शर्तें रखते हुए युद्ध खत्म होने की उम्मीद जता रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि रूस के साथ पिछले 4 साल से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अगले कुछ दिनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके बाद अमेरिकी दूत अगले सप्ताहांत अमेरिका में संभावित बैठकों से पहले समझौते के मसौदे को रूस के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। जेलेंस्की ने सोमवार देर रात कहा कि बर्लिन में दिन में अमेरिका के साथ चर्चा की गई शांति योजना का मसौदा बहुत ही व्यावहारिक है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने हालांकि आगाह किया कि रूस के कब्जे में उसके क्षेत्र सहित कुछ मुद्दे हैं, जो अब भी अनसुलझे हैं। अमेरिका के नेतृत्व में की जा रही शांति की कोशिशें आगे बढ़ती प्रतीत हो रही हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिका, यूक्रेन और पश्चिमी यूरोप के अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए कुछ प्रस्तावों पर आपत्ति जता सकते हैं, जिनमें यूक्रेन के लिए युद्धोत्तर सुरक्षा गारंटी भी शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि उनके द्वारा तैयार की गई शांति योजना के लगभग 90 प्रतिशत बिंदुओं पर यूक्रेन और यूरोप में सहमति है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि हम शांति समझौते के पहले से कहीं अधिक करीब हैं। अब भी कई मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। जेलेंस्की ने दोहराया कि यूक्रेन, देश के आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण डोनबास क्षेत्र के किसी भी हिस्से पर रूस के नियंत्रण को मान्यता नहीं देगा। डोनबास में लुहांस्क और दोनेत्स्क क्षेत्र शामिल हैं। रूस की सेना का इन दोनों क्षेत्रों पर पूर्ण नियंत्रण नहीं है।

वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मंगलवार को नीदरलैंड्स की यात्रा पर रवाना होने से पहले कहा कि अमेरिकी समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं। वे डोनबास में एक मुक्त आर्थिक क्षेत्र का प्रस्ताव दे रहे हैं। मैं एक बार फिर इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि मुक्त आर्थिक क्षेत्र का अभिप्राय रूसी संघ के नियंत्रण में होना नहीं है। भूमि का मुद्दा व्यापक समझौते के रास्ते में सबसे कठिन बाधाओं में से एक बना हुआ है। पुतिन चाहते हैं कि सैन्य कार्रवाई के जरिए कब्जे में लिए गए चार प्रमुख क्षेत्रों के साथ ही 2014 में कब्जा किये गए क्रीमिया प्रायद्वीप को रूसी क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जाए।

प्रस्तुति: एपी भारती (पत्रकार, संपादक पीपुल्स फ्रैंड, रुद्रपुर, उत्तराखंड)

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