नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2025। भारत सरकार की नाकामी और कुप्रबंधन के कारण उड़ान संकट से जूझ रही प्राइवेट विमानन कंपनी इंडिगो ने बुधवार को दिल्ली और मुंबई सहित तीन प्रमुख हवाई अड्डों पर लगभग 220 उड़ानें रद्द कर दीं, जबकि कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पीटर एल्बर्स ने दावा किया था कि एयरलाइन का परिचालन फिर से पटरी पर आ गया है। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे संकट करार देते हुए सरकार से जबाव मांगा है। इंडिगो संकट संसद में भी उठा जिसमें माकपा सांसद ने इसके लिए केवल केंद्र की मोदी सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। संकटग्रस्त एयरलाइन ने दिल्ली हवाई अड्डे पर 137 उड़ानें और मुंबई हवाई अड्डे पर 21 उड़ाने रद्द कर दीं। इंडिगो ने बेंगलुरु हवाई अड्डे पर 61 उड़ानें रद्द कर दीं, जिनमें 35 आगमन और 26 प्रस्थान उड़ानें शामिल हैं। एल्बर्स ने मंगलवार को दावा किया था कि एयरलाइन फिर से पटरी पर आ गई है और इसका संचालन स्थिर है, जबकि सरकार ने इंडिगो के शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में 10 प्रतिशत या प्रतिदिन स्वीकृत लगभग 2,200 उड़ानों में से लगभग 220 उड़ानों की कटौती की है।
इंडिगो ने अकेले मंगलवार को छह महानगरों से 460 उड़ानें रद्द कर दी थीं। एल्बर्स ने यह भी कहा कि लाखों ग्राहकों को उनके टिकट का पूरा शुल्क लौटाया जा चुका है। उन्होंने कोई विशिष्ट संख्या नहीं बताई, लेकिन उन लोगों को मुआवजे के मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी जिनकी उड़ानें अचानक रद्द कर दी गईं, जिनकी उड़ानों में बहुत देरी हुई या जिनकी सहमति के बिना उड़ानें पुनर्निर्धारित की गईं। बीते 10 दिनों में इंडिगो की कई हजार उड़ाने रद्द हो गईं, यात्रियों को भारी संकटों का सामना करना पड़ा है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के यात्री चार्टर के मुताबिक, अगर कोई विमानन कंपनी प्रस्थान से कम से कम दो हफ्ते पहले यात्री को उसकी उड़ान रद्द होने की सूचना देने में विफल रहती है, तो मुआवजा देना कानूनी रूप से अनिवार्य है और इसकी राशि उड़ान की अवधि पर निर्भर करती है। सुरक्षा नियमों को लेकर सख्त योजना बनाने में विफल रहने के बाद इंडिगो ने देशभर में हजारों उड़ानें रद्द कर दी हैं जिससे यात्रियों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, अन्य घरेलू विमानन कंपनियों के किराए में वृद्धि हो रही है और पूरे भारत के हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी मची हुई है। एक दिसंबर से शुरू हुई यह स्थिति पांच दिसंबर तक जारी रहने के बाद सरकार ने अंततः हस्तक्षेप किया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एल्बर्स और इंडिगो के मुख्य परिचालन अधिकारी इसिड्रो प्रोक्वेरास (राहुल भाटिया के नियंत्रण वाली कंपनी के लिए जवाबदेह प्रबंधक) को कारण बताओ नोटिस जारी किया और हवाई किराये पर सीमा लगाने का भी आदेश दिया।
इस बीच इंडिगो संकट का मामला दिल्ली हाई कोर्ट में भी उठा। दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से बुधवार को सवाल किया कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई जिसके कारण इंडिगो की कई उड़ान रद्द करनी पड़ीं। अदालत ने इन हालात को संकट करार दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि फंसे हुए यात्रियों को हुई परेशानी और उत्पीड़न के अलावा, यह अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान का भी सवाल है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह सवाल भी किया कि ऐसी संकटपूर्ण स्थिति में अन्य विमानन कंपनियां हालात का फायदा उठाकर यात्रियों से टिकटों के लिए भारी कीमत कैसे वसूल सकती हैं। केंद्र और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की ओर से पेश वकील ने अदालत को सूचित किया कि कानूनी प्रावधान पूरी तरह लागू हैं और प्दकपळव को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है, जिसने काफी क्षमायाचना की है।
केंद्र सरकार के वकील ने यह भी कहा कि यह संकट कई दिशानिर्देशों के अनुपालन न करने के कारण पैदा हुआ, जिनमें चालक दल के सदस्यों के उड़ान की ड्यूटी के घंटों से संबंधित नियम भी शामिल हैं। अदालत इंडिगो द्वारा सैकड़ों उड़ान रद्द किए जाने से प्रभावित यात्रियों को सहायता और भुगतान राशि वापस दिलाने के लिए केंद्र को निर्देश देने संबंधी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
माकपा सदस्य ए ए रहीम ने बुधवार को राज्यसभा में हालिया इंडिगो संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह हालात अंधाधुंध निजीकरण और नियमन में ढील का नतीजा हैं, जिनकी वजह से देश का विमानन क्षेत्र डुओपोली (ऐसी स्थिति जब बाजार में दो ही कंपनियों का दबदबा रहता है) में बदल गया है। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए रहीम ने सरकार से अनुरोध किया कि उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) नियमों को शिथिल न किया जाए। रहीम ने कहा कि यह संकट केवल इंडिगो का नहीं है। उन्होंने कहा, इस पूरे बड़े संकट के लिए एकमात्र दोषी केंद्र सरकार है। यह सरकार की नवउदारवादी आर्थिक नीतियों, निजीकरण और विमानन क्षेत्र के नियमन में ढील का प्रत्यक्ष परिणाम है।
ए ए रहीम ने बाजार में बढ़ती एकाधिकार प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इंडिगो अब कुल उड़ानों का 65.6 प्रतिशत संचालित करती है, जबकि एयर इंडिया 25.7 प्रतिशत उड़ानों का परिचालन करती है। उन्होंने कहा, भारतीय विमानन क्षेत्र का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल दो एयरलाइनों, इंडिगो और टाटा के कब्जे में है। रहीम ने सरकार के इस दावे को भी खारिज किया कि एयर इंडिया का निजीकरण उसे बदल देगा। उन्होंने कहा, सुरक्षा, सेवाओं की गुणवत्ता और विमान की गुणवत्ता हर मामले में स्थिति बेहद खराब है। सरकार ने यह भ्रम पैदा किया कि सार्वजनिक क्षेत्र बेकार है और निजी क्षेत्र चमत्कार कर सकता है।
ए ए रहीम ने कहा कि इंडिगो संकट के दौरान एयर इंडिया लाभ कमाने में जुटी है। उन्होंने आरोप लगाया टाटा की एयर इंडिया इस कथित इंडिगो संकट के दौरान क्या कर रही है? यह संकट काल में मानव पीड़ा से लाभ उठा रही है। अपने अनुभव का हवाला देते हुए रहीम ने कहा कि सरकार द्वारा पिछले शुक्रवार को 1,500 किलोमीटर से अधिक दूरी वाली उड़ानों के किराए को 18,000 रुपये पर सीमित करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद दिल्ली-तिरुवनंतपुरम के लिए बुधवार सुबह उसी दिन यात्रा के लिए इकोनॉमी श्रेणी का किराया 64,783 रुपये था।
ए ए रहीम ने सवाल किया, सरकार का नियंत्रण कहां है? निजी विमानन कंपनियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। रहीम ने एफडीटीएल (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) नियमों में ढील देने या इंडिगो को कोई विशेष छूट देने के खिलाफ चेताया। उन्होंने डुओपोली वाले बाजार में किराया नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियामक तंत्र की मांग की।
प्रस्तुति: एपी भारती (पत्रकार, संपादक पीपुल्स फ्रैंड, रुद्रपुर, उत्तराखंड)
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